पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात

——————————————-
किसी ने पुकारा नाम मेरा डर रहा हूँ मैं,
सुन कर आहट मौत की मर रहा हूँ मैं।
फूल को मसलने वाले बागबान को देख,
रात भर आँखों में आँसू भर रहा हूँ मैं।
बागबान ने उजाडा था ख़ुद चमन अपना,
तब से इसी ख़्याल में बिख़र रहा हूँ मैं।
ऐसे ज़ालिम बाग़बान होते हैं इस जहां में,
ऐसी भयानक बातों से बेख़बर रहा हूँ मैं।
“फ़क़ीरा” ख़ुद अपना अंजाम सोचे बिना,
वहशी दरिंदों से मुक़ाबला कर रहा हूँ मैं।


More Stories
यमुना एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, तेज रफ्तार कंटेनर ने यात्रियों को रौंदा, 6 की मौत
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड देना अनिवार्य
गणतंत्र दिवस परेड 2026- सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता और झांकियों के विजेताओं की घोषणा